Monday, October 5, 2026
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सचिव बोले— फर्म संचालित है, शिकायतकर्ता ने बताया संदिग्ध,पारेमेर पंचायत में 15वें वित्त आयोग के भुगतानों पर प्रशासनिक जांच जारी..!

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सचिव बोले— फर्म संचालित है, शिकायतकर्ता ने बताया संदिग्ध,पारेमेर पंचायत में 15वें वित्त आयोग के भुगतानों पर प्रशासनिक जांच जारी..!

धरमजयगढ़। जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत पारेमेर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। 15वें वित्त आयोग मद् की राशि के उपयोग को लेकर दर्ज एक गंभीर शिकायत ने पंचायत की भुगतान प्रणाली, लेखा परीक्षण तथा वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में पहुंच चुका है तथा संबंधित अभिलेखों का परीक्षण प्रारंभ कर दिया गया है।
वहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने भारत सरकार के लोक शिकायत निवारण पोर्टल के माध्यम से विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की थी, जिसे आवश्यक जांच एवं कार्रवाई हेतु कलेक्टर कार्यालय रायगढ़ को अग्रेषित किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत पारेमेर ने 15वें वित्त आयोग की शासकीय राशि का भुगतान ‘निधि ट्रेडर्स’ नामक जीएसटी पंजीकृत फर्म जिसका संचालक निधि यादव है,को किया, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार फर्म के पंजीकृत पते के भौतिक सत्यापन के दौरान वहां न तो कोई दुकान मिली, न गोदाम और न ही किसी प्रकार का व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होता पाया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस फर्म के नाम पर लाखों रुपये के शासकीय भुगतान किए गए, उसका वास्तविक व्यावसायिक अस्तित्व ही संदेह के घेरे में है। यदि उचित जांच कार्रवाई की जाती है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बल्कि शासकीय धनराशि के उपयोग की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा।
₹71,700 के टैक्स इनवॉइस तिथि विहीन ने बढ़ाया संदेह…
और वहीं प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार मेसर्स निधि ट्रेडर्स द्वारा जारी बिल क्रमांक 72 में क्रेशर गिट्टी के लिए ₹50,000 तथा मिक्सर मशीन किराया ₹21,700 दर्शाकर कुल ₹71,700 का भुगतान दर्शाया गया है। बिल के शीर्ष पर स्पष्ट रूप से “TAX INVOICE” अंकित है, किंतु उसमें CGST एवं SGST का विवरण पूरी तरह रिक्त है। इतना ही नहीं, शिकायत के अनुसार बिल पर दिनांक का भी अभाव है।
वहीं कर विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई पंजीकृत फर्म टैक्स इनवॉइस जारी करती है तो उसमें लागू जीएसटी दर, कर की राशि तथा कर सहित अंतिम देय राशि का स्पष्ट उल्लेख होना आवश्यक होता है। ऐसी स्थिति में बिना कर विवरण वाला टैक्स इनवॉइस वित्तीय एवं कर संबंधी नियमों के अनुपालन पर प्रश्न खड़े करता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के उपरांत ही स्पष्ट होगा।

सचिव ने किया फर्म का बचाव..

वहीं इधर मामले में पत्रकारों द्वारा सचिव से फोन के माध्यम से संपर्क जानकारी चाही तो उन्होंने यानि सचिव द्वारा वेंडर का पक्ष में बयान देते हुए उक्त वेंडर का फर्म होने का दावा कर रहे हैं,जो कहीं न कहीं मिलीभगत सांठगांठ करके लगातार फर्जी भुगतान किया जाता रहा होगा। लेकिन दूसरी ओर शिकायतकर्ता का दावा है कि पंजीकृत पते सहित आसपास के क्षेत्र में निधि टेड्रस फर्म का कोई बोर्ड, दुकान, गोदाम अथवा व्यावसायिक गतिविधि नहीं है,न कोई ग्रामवासी देखा न उक्त क्षेत्रों में कार्यरत व्यापारियों दुकानदारों ने। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि स्थानीय ग्रामीणों एवं क्षेत्र के अन्य व्यापारियों से पुछताछ में भी ऐसी किसी सक्रिय फर्म की जानकारी सामने नहीं आई। लेकिन मजेदार बात तो यह है कि उक्त ग्राम पंचायत सचिव का बचाव कहना है कि दुकान है। और शायद इन्हीं सब कारणों के शासन ग्राम पंचायत विकास को लेकर करोड़ों रुपए बहाए जा रहे लेकिन विकास ठप्प होते जा रही है।

अन्य पंचायतों में लगे बिल, मिलीभगत के आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित वेंडर के बिल केवल ग्राम पंचायत पारेमेर ही नहीं बल्कि अन्य ग्राम पंचायतों में भी भुगतान के लिए उपयोग किए गए हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि संबंधित फर्म के नाम पर पंचायतों में लगातार भुगतान किए जाने की आशंका है तथा इस पूरे प्रकरण में पंचायत कर्मियों और वेंडर के बीच संभावित मिलीभगत की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट की मांग

बहरहाल शिकायतकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), राज्य कर विभाग तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि फर्म के पंजीकृत पते का भौतिक सत्यापन कराया जाए। प्रस्तुत जीएसटी बिलों एवं टैक्स इनवॉइस की तकनीकी सहित तिथि विहीन बिल जारी पर भी सभी का वित्तीय जांच कराई जाए। ग्राम पंचायत पारेमेर द्वारा 15वें वित्त आयोग मद से किए गए सभी भुगतानों का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराया जाए। और अनियमितता पर दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित वेंडर के विरुद्ध प्रचलित वित्तीय नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इधर सूत्रों का कहना है कि ग्राम पंचायत पारेमेर में कई विकास कार्यों एवं वित्तीय लेन-देन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। यदि वर्तमान जांच निष्पक्ष एवं गहन तरीके से की जाती है, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है। शिकायत में लगाए गए जांच प्रतिवेदन सक्षम प्राधिकारी निष्कर्ष कर रही है,वित्तीय नियमों का उल्लंघन पर संबंधित विभाग किस प्रकार की वैधानिक कार्रवाई करते हैं।

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Tej kumar Sahu
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