धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ वनमंडल के वनपरिक्षेत्र बाकारूमा में बीते करीब एक माह से 31 हाथियों के महादल की मौजूदगी ने ग्रामीण अंचल में चिंता और दहशत का वातावरण बना रखा है।
हाथियों के झुंड द्वारा कई स्थानों पर धान की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। ऐसे समय में वन और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व की एक सुखद तस्वीर ससकोबा के जंगल से सामने आई है। जहां पर ग्रामीणों के अनुसार, ससकोबा के जंगल क्षेत्र में कुछ दिन पूर्व एक हाथिनी ने एक नवजात हाथी शावक को जन्म दिया। जन्म के बाद से हाथियों का दल गांव के आसपास के जंगलों में विचरण करता देखा जा रहा है। हाथी शावक के जन्म की खबर ने जहां ग्रामीणों में कौतूहल पैदा किया, वहीं स्थानीय लोगों ने इसे जंगल के जीवन-चक्र में आई एक शुभ घटना के रूप में देखा।
बता दें जानकारी अनुसार,29 सितंबर 2026 को गनपतपुर और ससकोबा के बीच स्थित पुल के समीप पहाड़ी जंगल की सीमा पर ग्रामीणों ने नवजात हाथी शावक के जन्म की खुशी में आदिवासी परंपरा के अनुरूप छठ्ठी कार्यक्रम आयोजित किया। वहीं ग्रामीणों ने विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर वन्यजीवों के प्रति अपनी आत्मीयता और सम्मान का परिचय दिया।
दहशत के बीच संरक्षण की उम्मीद…
हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने से ग्रामीणों की परेशानियां अपनी जगह हैं, लेकिन इसी के बीच नवजात शावक के जन्म पर ग्रामीणों द्वारा खुशी मनाया जाना मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व की एक महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करता है। यह आयोजन इस बात का भी संकेत देता है कि जंगल केवल संसाधन नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं का अभिन्न हिस्सा है। वन विभाग की टीम भी क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, जंगल में अनावश्यक प्रवेश से बचने तथा हाथियों को उकसाने या उनके रास्ते में बाधा नहीं डालने की सलाह दी जा रही है।
वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञों के अनुसार, हाथी शावक के जन्म के बाद झुंड की गतिविधियों में संवेदनशीलता बढ़ सकती है। ऐसे में ग्रामीणों और वन विभाग के बीच समन्वय, सतर्कता तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। फसल सुरक्षा और मानव सुरक्षा के साथ-साथ हाथियों के प्राकृतिक आवास एवं उनके सुरक्षित विचरण मार्गों का संरक्षण भी इस पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
बहरहाल ससकोबा में मनाई गई यह छठ्ठी इसलिए भी चर्चा में है कि जहां एक ओर हाथियों की मौजूदगी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर उसी जंगल में जन्मे नन्हे मेहमान के स्वागत ने इंसान और वन्यजीव के रिश्ते का एक भावनात्मक पक्ष सामने रखा है। ग्रामीणों की यह पहल जंगल के प्रति पारंपरिक संवेदना और वन्यजीवों के प्रति सम्मान का संदेश देती नजर आई। और वनपरिक्षेत्र बाकारुमा सहित समस्त वनविभाग टीम इस आयोजन की जमकर सराहना कर रही है।
इस आयोजन में गनपतपुर सरपंच हरिओमशंकर राठिया, मुरली कुमार साहू,हरिश्चंद्र राठिया, ससकोबा टीएसएस अध्यक्ष बोधसिंह राठिया, ससकोबा सरपंच पति अनिल कुमार राठिया, पुनेश्वर राठिया (डीसीसी), रैरूमा खुर्द के अमित कुमार राठिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चे मौजूद रहे। नवजात शावक के जन्म की खुशी में ग्रामीणों के बीच उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिला।

