Saturday, October 3, 2026
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मितानिनों का महासंग्राम: सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान, 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना, लैलूंगा से रायपुर तक सड़कों पर उतरेंगी हजारों महिलाएं….

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मितानिनों का महासंग्राम: सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान, 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना, लैलूंगा से रायपुर तक सड़कों पर उतरेंगी हजारों महिलाएं….



रायपुर/लैलूंगा, 26 जुलाई 2025:
छत्तीसगढ़ की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली मितानिनें अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। 2023 के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों के लंबे समय तक पूरा न होने और बार-बार आश्वासन देकर भी सरकार के हाथ पीछे खींच लेने से नाराज़ मितानिन बहनों, मितानिन प्रशिक्षकों, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर्स और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर्स ने अब अनिश्चितकालीन कामबंद-कलमबंद आंदोलन की घोषणा कर दी है।

प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ और प्रशिक्षक कल्याण संघ के संयुक्त बैनर तले यह ऐतिहासिक हड़ताल 7 अगस्त 2025 से नवा रायपुर के ग्राम तुता में शुरू होगी, जिसमें प्रदेश भर से हजारों मितानिन कार्यकर्ता शामिल होंगी। इससे पहले 29 जुलाई को राज्य स्तरीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन के जरिए सरकार को चेतावनी दी जाएगी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन रायपुर से निकलकर पूरे छत्तीसगढ़ को जगा देगा।

📌 लैलूंगा में गूंजा विरोध का स्वर

रायगढ़ जिले के लैलूंगा ब्लॉक अंतर्गत अम्बेडकर चौक हाई स्कूल प्रांगण में 500 से अधिक मितानिन महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ ज़बरदस्त नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। “वादाखिलाफी नहीं सहेंगे”, “NHM में सविलियन चाहिए”, “50% वेतन वृद्धि लागू करो” जैसे नारों से चौक का माहौल गूंज उठा। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरीं और शासन को चेताया कि अगर अब भी उनकी अनदेखी की गई, तो इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

❗ क्या है मामला?

2023 के विधानसभा चुनाव में वर्तमान सरकार ने मितानिन कर्मचारियों के लिए दो प्रमुख वादे किए थे:

1. NHM (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) के अंतर्गत सविलियन यानी स्थायीकरण।


2. मितानिन, प्रशिक्षकों, फैसिलिटेटर्स और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर्स के वेतन/मानदेय में 50% की वृद्धि।



लेकिन अब लगभग 18 महीने गुजर चुके हैं और इनमें से कोई भी वादा जमीन पर उतर नहीं पाया है। उल्टा, मितानिन कार्यक्रम को फिर एक प्राइवेट NGO संस्था के हवाले कर दिया गया है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष और असुरक्षा की भावना पनप गई है।

🛑 कर्मचारियों की नाराज़गी क्यों बढ़ी?

पिछले 13 महीनों से वेतन भुगतान नियमित नहीं है।

3 से 4 माह में एक बार मानदेय मिलने से आर्थिक संकट में जी रहे हैं मितानिन।

आश्वासनों की झड़ी तो लगी रही, लेकिन कोई ठोस नीति या आदेश जारी नहीं हुआ।

NHM के संचालन को निजी संस्था को सौंपकर कर्मचारियों का भविष्य अस्थिर किया जा रहा है।


📣 संघ की दो प्रमुख मांगे:

1. मितानिनों को NHM के तहत नियमित किया जाए।


2. वादे के अनुसार 50% वेतन वृद्धि तत्काल प्रभाव से लागू की जाए।



🕰️ विगत संघर्ष की झलक:

13 दिसंबर 2024 को मितानिनों ने इन्हीं मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी।

NHM संचालक ने उस समय बातचीत कर आश्वासन दिया कि “शासन विचार कर रहा है।”

विश्वास के आधार पर हड़ताल स्थगित की गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

तब से अब तक कोई सार्थक निर्णय नहीं लिया गया।


⚠️ संभावित असर:

अगर मितानिनें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाती हैं, तो इसका सीधा असर गांव-गांव की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा।

गर्भवती महिलाओं की देखभाल,

नवजात शिशुओं की निगरानी,

टीकाकरण, दवा वितरण,

पोषण, मलेरिया-जांच,

जनजागरूकता जैसे सभी सेवाएं रुक सकती हैं।


ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह ठप हो सकती हैं, जिससे जनजीवन संकट में आ जाएगा।

🏛️ प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में

संघ ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव से पहले तो मितानिनों को “सेवा की देवी” कहकर सम्मानित करती रही, लेकिन अब उन्हें वेतन तक देने में कोताही बरत रही है। बार-बार की बैठकों में सिर्फ आश्वासन दिए गए, निर्णय नहीं। NGO संस्था को संचालन का जिम्मा देकर सरकार ने साबित कर दिया कि उसे कर्मचारियों की स्थिरता या कल्याण की परवाह नहीं।

✍️ मुख्यमंत्री से सीधी अपील

संघ ने मुख्यमंत्री विष्णु साय को पत्र लिखकर अपील की है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस विषय में दखल दें और चुनावी वादों को अमल में लाएं। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन प्रदेशव्यापी हो जाएगा और राजधानी की सड़कों पर हजारों मितानिनें डेरा डालेंगी।

📄 संलग्न दस्तावेज और प्रतिलिपि भेजी गई है:

2023 का चुनावी घोषणा पत्र

मांग पत्र
प्रतिलिपि इनको भेजी गई —

स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़

सचिव, स्वास्थ्य विभाग

NHM मिशन संचालक

उप संचालक (ARC), NHM नवा रायपुर



—

📍अंत में सवाल यह है:
क्या सरकार मितानिनों के भरोसे को कायम रख पाएगी, या फिर यह आंदोलन छत्तीसगढ़ की सत्ता को संवेदनहीनता की नई परिभाषा दे जाएगा?

“अब नहीं तो कभी नहीं” की तर्ज पर मितानिनें कमर कस चुकी हैं – रायपुर में तंबू गड़ेगा, आवाज गूंजेगी और जब तक वादे पूरे नहीं होते, धरना जारी रहेगा।

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Tej kumar Sahu
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