




भोजली पर्व पर अंगेकेला में गूंजा रामायण-भजन, दोपहर में विधिवत हुआ भोजली विसर्जन
रातभर भक्तिमय रहा माहौल, श्रद्धा और परंपरा के साथ ग्रामीणों ने दी भोजली को विदाई
लैलूंगा। ग्राम अंगेकेला में भोजली पर्व के अवसर पर धार्मिक एवं पारंपरिक आयोजन का भव्य माहौल देखने को मिला। भोजली पर्व को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह रहा। इस अवसर पर रात में रामायण पाठ, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता निभाई। देर रात तक रामायण की चौपाइयों और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
आयोजन के दौरान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से भगवान के भजनों का गायन किया और धार्मिक परंपराओं को निभाते हुए भोजली पर्व की महत्ता को बनाए रखा। गांव में आपसी भाईचारे और धार्मिक सद्भाव का भी सुंदर वातावरण नजर आया।
दोपहर में निकली भोजली विसर्जन यात्रा
रात के धार्मिक आयोजन के बाद अगले दिन दोपहर में भोजली का विधिवत विसर्जन किया गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली को लेकर विसर्जन स्थल तक पहुंचकर श्रद्धापूर्वक विदाई दी। इस दौरान भक्ति गीतों और जयकारों से माहौल गूंज उठा।
भोजली विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही। श्रद्धालुओं ने भोजली पर्व को आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बताते हुए पूरे उत्साह के साथ आयोजन में हिस्सा लिया।
आस्था के साथ परंपरा को सहेजने का संदेश
अंगेकेला में आयोजित भोजली पर्व के कार्यक्रम ने ग्रामीण संस्कृति और परंपरा की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। रात में रामायण-भजन कीर्तन और दोपहर में भोजली विसर्जन ने पूरे आयोजन को धार्मिक एवं सांस्कृतिक रंग से सराबोर कर दिया। ग्रामीणों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि आधुनिक समय में भी गांव की पारंपरिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को उत्साह के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आयोजन के सफल संचालन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, उल्लास और आपसी भाईचारे का माहौल बना रहा।
लैलूंगा के ग्राम अंगेकेला में भोजली पर्व का यह आयोजन ग्रामीण आस्था, लोकपरंपरा और सामाजिक एकजुटता की खूबसूरत मिसाल बनकर सामने आया।

