जनगणना 2027 का बिगुल: लैलूंगा में शुरू हुआ हाईटेक ट्रेनिंग, 150 प्रगणक मैदान में….

लैलूंगा। भारत सरकार की बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 को लेकर अब ज़मीनी हलचल तेज हो गई है। पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) के लिए लैलूंगा में भव्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया है। पी.एम. श्री सेजस स्कूल, लैलूंगा में चल रहे इस ट्रेनिंग कैंप में प्रशासनिक सख्ती और तकनीकी तैयारी का दमदार नज़ारा देखने को मिल रहा है।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राजस्व अधिकारी भरत लाल कौशिक (एडीएम) और तहसीलदार उज्ज्वल पांडेय के नेतृत्व में लैलूंगा तहसील के 100 और मुकडेगा तहसील के 50 प्रगणक व सुपरवाइजरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा—“कोई भी डेटा गलत नहीं होना चाहिए, हर जानकारी सटीक और समय पर चाहिए!”
क्या है खास इस बार
इस बार जनगणना सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि डिजिटल और हाईटेक सिस्टम के जरिए होगी। प्रशिक्षण में प्रगणकों को मोबाइल ऐप, डिजिटल फॉर्म, डेटा एंट्री और रियल टाइम अपडेट की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। घर-घर जाकर सर्वे करने की पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल लेकिन सख्त तरीके से समझाया गया है।
घर-घर पहुंचेगी सरकार की नजर
मकान सूचीकरण के जरिए हर घर की स्थिति, बुनियादी सुविधाएं, आवासीय ढांचा और अन्य जरूरी जानकारी जुटाई जाएगी। यही डेटा आगे चलकर सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की नींव बनेगा।
चुनौतियों से निपटने की भी तैयारी
प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया जा रहा है । कि सर्वे के दौरान आने वाली समस्याओं—जैसे लोगों का सहयोग न मिलना, तकनीकी दिक्कतें या डेटा में त्रुटि—से कैसे निपटा जाए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
6 दिन चलेगा मिशन ट्रेनिंग
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले 6 दिनों तक चरणबद्ध तरीके से चलेगा, जिसमें हर प्रगणक और सुपरवाइजर को पूरी तरह तैयार कर मैदान में उतारा जाएगा।
क्यों है इतना अहम
जनगणना के आंकड़े ही तय करते हैं कि किस क्षेत्र में कितनी सड़क, स्कूल, अस्पताल या अन्य सुविधाएं मिलेंगी। यानी यह सिर्फ गिनती नहीं, बल्कि भविष्य की विकास गाथा लिखने का आधार है।
कुल मिलाकर, लैलूंगा में शुरू हुआ यह अभियान अब प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है—जहां सटीकता, पारदर्शिता और तेजी ही सफलता की कुंजी होगी।






