

मुख्य यजमान, ग्राम पंचायत दियागढ़ के सरपंच पोथीराम सिदार ने आचार्य गणेश मिश्रा और केयूरभूषण तिवारी के सान्निध्य में विधि-विधान से गणपति पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह हवन संपन्न कराया। माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ से छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी शास्त्री ने जब माता सती का प्रसंग सुनाया तो हर कोई भाव-विभोर हो गया। उन्होंने बताया कि अभिमानवश माता सती ने कूंभज ऋषि से श्री राम कथा नहीं सुनी और राम पर संदेह कर बैठीं। बिना बुलावे पिता के यज्ञ में जाने पर जब शंकर और अपना अपमान सह न सकीं, तो योग अग्नि से शरीर त्याग दिया।
पर कथा यहीं नहीं रुकी… माता सती ने पुनः जन्म लिया और फिर हर-गौरी का विवाह बड़े आनंद से संपन्न हुआ। हिमाचल ने कन्यादान किया, भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं ने उपहार भेंट किए, और ब्रह्मा ने वेदोक्त रीति से विवाह कराया।
विवाह का उत्सव ऐसा सजा कि भक्त झूम उठे। ओडिया भजनों और छत्तीसगढ़ी विवाह गीतों पर पूरा पंडाल नाच उठा।
इस पावन अवसर पर सरपंच पोथीराम सिदार, कान्हु गुप्ता, प्रमीश विश्वाल, नत्थुराम सिदार, भीम सिदार, नंदकुमार यादव, डॉ प्रकाश, विश्वास समेत समस्त ग्रामवासी और क्षेत्रवासी मौजूद रहे। सभी ने श्री राम जी की जीवन गाथा का श्रवण किया और किशोरी राजकुमारी तिवारी शास्त्री का स्नेह आशीर्वाद प्राप्त किया।
चिंगारी में भक्ति की ये चिंगारी, अब हर मन में राम नाम का उजाला कर रही!
🖋️रोहित कुमार चौहान /न्यूज़ एडिटर&चीफ/8103692477






