रात के अंधेरे में धरती की छाती चीरने का खेल! लैलूंगा में धड़ल्ले से चल रहा बोर खनन, सूचना के बाद भी खामोश अधिकार….
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है रातों-रात बोर खनन का गोरखधंधा?
लैलूंगा। लैलूंगा क्षेत्र में इन दिनों रात के अंधेरे में बोर खनन का खेल खुलेआम चलने की चर्चा जोरों पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन में नियम-कायदों की बातें करने वाले जिम्मेदार विभाग रात होते ही आंखें मूंद लेते हैं और धरती की छाती को चीरने का काम शुरू हो जाता है।
बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर देर रात बोर मशीनों की आवाज गूंजती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह मौन दिखाई दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सभी कार्य नियमों के तहत हो रहे हैं तो फिर रात के अंधेरे में ही खनन और बोरिंग का काम क्यों कराया जा रहा है? आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि रातों-रात मशीनें पहुंचती हैं और सुबह होने से पहले काम भी पूरा हो जाता है।
रात में बनते हैं आदेश, रात में ही चलती हैं मशीनें!
क्षेत्र में चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है। यही कारण है कि शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
जनता पूछ रही सवाल
आखिर किसके इशारे पर रात में बोर खनन कराया जा रहा है?
सूचना मिलने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
क्या नियम-कानून केवल आम जनता के लिए हैं?
रातों-रात आदेश जारी कर किसे लाभ पहुंचाया जा रहा है?
अब प्रशासन की परीक्षा
क्षेत्रवासियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा यह संदेश जाएगा कि लैलूंगा में रात के अंधेरे में कुछ भी संभव है और कानून सिर्फ कागजों तक सीमित है।
“धरती की छाती फट रही है, मशीनें गरज रही हैं, शिकायतें हो रही हैं… लेकिन जिम्मेदारों की खामोशी आखिर किस राज़ की ओर इशारा कर रही है?”
रात के अंधेरे में धरती की छाती चीरने का खेल! लैलूंगा में धड़ल्ले से चल रहा बोर खनन, सूचना के बाद भी खामोश अधिकार….
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