Saturday, June 13, 2026
spot_img

ईमानदार पत्रकार को बदनाम करने की साज़िश बेनकाब: अपराधियों और भ्रष्ट पटवारी का गठजोड़ चंद्रशेखर जायसवाल की निर्भीकता से घबराया…

ईमानदार पत्रकार को बदनाम करने की साज़िश बेनकाब: अपराधियों और भ्रष्ट पटवारी का गठजोड़ चंद्रशेखर जायसवाल की निर्भीकता से घबराया…




लैलूंगा, रायगढ़ / लैलूंगा क्षेत्र में पत्रकारिता के मानकों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर जायसवाल एक बार फिर असामाजिक तत्वों और भ्रष्ट पटवारी के निशाने पर हैं। उनकी निर्भीक रिपोर्टिंग और सच्चाई को उजागर करने की हिम्मत अब अपराधियों और भ्रष्ट अफसरों को चुभने लगी है। यही कारण है कि अब उन्हें बदनाम करने की साजिशें रची जा रही हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 जून को पत्रकार चंद्रशेखर जायसवाल ने लैलूंगा थाना में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने कुछ व्यक्तियों द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी देने की बात कही थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस कार्रवाई की अपेक्षा थी, लेकिन उल्टा हुआ। धमकी देने वालों में से चार लोग चंद्रशेखर जायसवाल को फोन कर माफी मांगने लगे और राजीनामा के लिए दबाव बनाने लगे। जब जायसवाल अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटे, तो इन असामाजिक तत्वों ने पलटवार करते हुए खुद थाने में उनके खिलाफ झूठे आवेदन दे डाले।

इन फर्जी आवेदनों में पत्रकार के खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए और उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। यह न केवल एक ईमानदार पत्रकार के आत्मसम्मान पर हमला है, बल्कि लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता की आत्मा को कुचलने का प्रयास भी है।

अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत

सूत्रों की मानें, तो यह षड्यंत्र एक सुनियोजित रणनीति के तहत रचा गया है, जिसमें कुछ कुख्यात अपराधी और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इस कड़ी में सबसे प्रमुख नाम है – राजेश कुमार शर्मा, जिसे क्षेत्र में “रेगड़ी वाला” के नाम से जाना जाता है। यह व्यक्ति पूर्व में लूट, मारपीट और धमकी जैसे संगीन मामलों में जेल जा चुका है और फिलहाल जमानत पर बाहर है। उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, किसी भी कानूनी या सामाजिक दावे पर संदेह किया जाना स्वाभाविक है।

दूसरा नाम पटवारी संजय भगत का है, जिन पर पहले से ही रिश्वतखोरी, गैरहाजिरी और शराब सेवन के आरोप लग चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भगत अक्सर अपने कार्यक्षेत्र में नदारद रहते हैं और जब आते हैं तो “सेवा शुल्क” यानी रिश्वत के बिना कोई काम नहीं करते। ऐसे में जब उनकी करतूतें उजागर होने लगीं, तो पत्रकार को ही निशाना बनाने की योजना बनाई गई।

जनता और पत्रकार समाज का आक्रोश

इस पूरे घटनाक्रम के बाद लैलूंगा क्षेत्र में पत्रकार समुदाय और आम जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का मानना है कि चंद्रशेखर जायसवाल जैसा निर्भीक और ईमानदार पत्रकार ही है, जो वर्षों से क्षेत्र के भ्रष्टाचार, सरकारी लापरवाही और असामाजिक गतिविधियों को उजागर करता रहा है। ऐसे व्यक्ति को झूठे आरोपों में फंसाकर चुप कराना लोकतंत्र की हत्या जैसा है।

स्थानीय पत्रकार संघ, प्रेस क्लब, और सामाजिक संगठनों ने इस साजिश की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से मांग की है कि झूठे आवेदन देने वाले तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, लैलूंगा थाना से अपेक्षा की जा रही है कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करे, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

चौंकाने वाली बात यह है कि पत्रकार की शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय, अब तक पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उल्टा फर्जी आरोपों की जांच की आड़ में पीड़ित पत्रकार को ही मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रशासन की इस चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं – क्या प्रशासन अपराधियों के दबाव में है? क्या भ्रष्ट पटवारी को बचाया जा रहा है?

यदि प्रशासन अपनी निष्क्रियता को यूं ही बनाए रखता है, तो आने वाले दिनों में यह मामला केवल पत्रकार बनाम अपराधी नहीं रहेगा, बल्कि यह जनता बनाम व्यवस्था का रूप ले लेगा।

सड़क पर उतरेगा जनसमुदाय?

जनता और पत्रकारों ने संकेत दिया है कि यदि प्रशासन जल्द ही इस प्रकरण में न्यायोचित कार्रवाई नहीं करता, तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। यह आंदोलन सिर्फ चंद्रशेखर जायसवाल की गरिमा के लिए नहीं होगा, बल्कि उन सभी पत्रकारों के लिए होगा जो सत्य और न्याय के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं।

पत्रकारिता पर हमला, लोकतंत्र पर हमला

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति विशेष का नहीं है, यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जुड़ा है। यदि इस तरह की साजिशें सफल होती हैं, तो ईमानदार पत्रकारों का मनोबल टूटेगा और समाज में सच्चाई सामने लाने वाली आवाजें धीरे-धीरे खामोश हो जाएंगी।

पत्रकार चंद्रशेखर जायसवाल की लड़ाई आज अकेले की नहीं रही, यह अब पूरे क्षेत्र की लड़ाई बन गई है – सत्य बनाम साजिश, ईमानदारी बनाम भ्रष्टाचार, और लोकतंत्र बनाम दमन का।

अब देखना यह है कि लैलूंगा थाना और प्रशासन किसके साथ खड़ा होता है – सच्चाई के या साजिशकर्ताओं के?

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
Tej kumar Sahu
Tej kumar Sahuhttp://tej24cgnews.in
EDITOR - TEJ24CGNEWS MO.NO.6267583973
RELATED ARTICLES

सड़क नहीं, विकास की रफ्तार है ये! कुंजारा में अजेय योद्धा जनपद उपाध्यक्ष मनोज अग्रवाल के करकमलों से C.C. रोड निर्माण का भूमि पूजन...

सड़क नहीं, विकास की रफ्तार है ये! कुंजारा में अजेय योद्धा जनपद उपाध्यक्ष मनोज अग्रवाल के करकमलों से C.C. रोड निर्माण का भूमि पूजन...

लैलूंगा के बेहरा पारा वार्ड क्रमांक 8 में सड़क समस्या का निजात नहीं होने पर चुनाव का होगा बहिस्कार

लैलूंगा के बेहरा पारा वार्ड क्रमांक 8 में सड़क समस्या का निजात नहीं होने पर चुनाव का होगा बहिस्कार लैलूंगा के बेहरा पारा वार्ड क्रमांक...

मितानिनों का महासंग्राम: सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान, 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना, लैलूंगा से रायपुर तक सड़कों पर...

मितानिनों का महासंग्राम: सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान, 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना, लैलूंगा से रायपुर तक सड़कों पर...

लैलूँगा थाना में शांति समिति की बैठक संपन्न…होली त्योहार में हुडदंग करने वाले गुंडे बदमाशो की खैर नहीं… पढ़िए पूरी खबर

लैलूँगा थाना में शांति समिति की बैठक संपन्न :होली पर्व पर पुलिस चौकस, शांति और सौहार्द के लिए व्यापक तैयारियां हुडबाजियो की खैर नही         ...

LAILUNGA NEWS

ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु “आरईएम” के मार्गदर्शन कार्यक्रम संपन्न !

ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु "आरईएम" के मार्गदर्शन कार्यक्रम संपन्न !लैलूंगा :- नाबार्ड एवं आईएसडीजी रिसर्च संस्‍थान   के संयुक्त तत्वावधान में ग्रामीण उधमिता ...
Latest